सोशल मीडिया से दिमाग हो रहा है ‘हंग’? : कहीं आप भी ‘Functional Freeze’ के शिकार नहीं हैं? जानिए लक्षण

Functional freeze

Functional freeze आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर थकान महसूस करते हैं, लेकिन क्या कभी ऐसा हुआ कि आप अपना सारा काम तो कर रहे हैं, लेकिन अंदर से पूरी तरह से खाली और थके हुए महसूस कर रहे हैं? यदि हाँ, तो आप ‘फंक्शनल फ़्रीज़’की स्थिति में हो सकते हैं।

सोशल मीडिया के ज़माने में हमारा दिमाग इतना ओवरलोड हो गया है कि हम इसे पहचान भी नहीं पाते, और अब दुनिया भर में इस बात पर रिसर्च हो रही है कि लोगों को सोशल मीडिया से दूर कैसे रखा जाए और उनके दिमाग को शांत कैसे किया जाए। सोशल मीडिया ऐप्स पर लगातार स्क्रॉल करने और काम के प्रेशर की वजह से हमारा दिमाग रिलैक्स नहीं हो पाता।

इससे दिमाग ओवरलोड हो जाता है, जिससे लगातार बेचैनी महसूस होती है। वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च की है जिसमें पता चला है कि सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल से लोगों के दिमाग पर दबाव पड़ रहा है। लोगों को पूरी नींद नहीं मिल रही है, और इस स्थिति को वैज्ञानिकों ने “फंक्शनल फ्रीज़” नाम दिया है।

यह लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करने या काम के प्रेशर की वजह से दिमाग के नर्वस सिस्टम पर पड़ने वाला दबाव है, जो इंसान के दिमाग पर असर डालता है। इससे शुरुआत में मानसिक समस्याएं या स्ट्रेस के लक्षण दिख सकते हैं। इसलिए, अगर आप आजकल सोशल मीडिया पर बहुत ज़्यादा समय बिता रहे हैं, तो अभी इसका इस्तेमाल कम कर दें ताकि आपकी मानसिक सेहत और फोकस बेहतर हो, और आपको अच्छी नींद मिल सके।

​हाल ही में मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स ने सोशल मीडिया और सूचनाओं के अत्यधिक बोझ (Information Overload) के कारण होने वाली इस स्थिति पर चिंता जताई है।

​क्या है फंक्शनल फ्रीज (What is Functional Freeze)?

​अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, फंक्शनल फ्रीज कोई आधिकारिक मेडिकल डायग्नोसिस नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जो लंबे समय तक चलने वाले तनाव (Chronic Stress) के कारण पैदा होती है।

  • स्थिति: आप ऑफिस जाते हैं, घर के काम करते हैं और सामाजिक जिम्मेदारियां भी निभाते हैं, लेकिन आपका दिमाग “सर्वाइवल मोड” में चला जाता है।
  • कारण: कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉर्ज ए. बोनानो के मुताबिक, यह रोजमर्रा की जिंदगी के दबाव, परफेक्ट दिखने की होड़ और सोशल मीडिया पर आने वाली लगातार बुरी खबरों का नतीजा है।

Functional freeze ​आपके नर्वस सिस्टम पर इसका असर

​जब हमारा दिमाग लगातार ‘खतरे’ (जैसे- काम का प्रेशर या सोशल मीडिया का शोर) को महसूस करता है, तो हमारा नर्वस सिस्टम हमेशा अलर्ट मोड पर रहता है। इससे दिमाग को कभी आराम नहीं मिल पाता।

​”बहुत ज्यादा खबरें और ऑनलाइन जानकारी दिमाग को ओवरलोड कर देती हैं, जिससे व्यक्ति अंदर से थका हुआ और तनाव में रहने लगता है।”

Functional freeze ​इससे बाहर निकलने के 4 प्रभावी तरीके (How to Overcome It)

​अगर आप भी इस मानसिक भारीपन से जूझ रहे हैं, तो एक्सपर्ट्स ये सलाह देते हैं:

​1. वजह को पहचानें (Identify the Root Cause)

​डॉ. बोनानो कहते हैं कि सबसे पहले अपनी परेशानियों को पहचानें। functional freeze क्या यह सोशल मीडिया की वजह से है? या काम के दबाव की वजह से? जब तक आप समस्या को समझेंगे नहीं, समाधान मुश्किल है।Top 5 Yoga Poses to Improve Focus and Concentration

​2. पर्याप्त नींद लें (Prioritize Sleep)

​थकान का सबसे बड़ा कारण नींद की कमी है। एक अच्छी नींद आपके दिमाग को ‘Reset’ करने में मदद करती है और नर्वस सिस्टम को शांत करती है।

​3. शरीर को सक्रिय करें (Active Lifestyle)

​योग, मॉर्निंग वॉक या रनिंग केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति के लिए भी जरूरी हैं। शारीरिक गतिविधि से नर्वस सिस्टम को संकेत मिलता है कि अब वह ‘Freeze’ मोड से बाहर आ सकता है।

​4. एक्सपर्ट की मदद लें (Seek Therapy)

​अगर यह भारीपन और थकान लंबे समय तक बनी रहे, तो किसी थेरेपिस्ट या काउंसलर से बात करने में संकोच न करें। प्रोफेशनल गाइडेंस आपको इस चक्र से बाहर निकाल सकती है।

फंक्शनल फ्रीज( functional freeze)का मनोविज्ञान: क्यों हमारा दिमाग ‘हंग’ हो जाता है?

​जब हम कंप्यूटर पर एक साथ बहुत सारे भारी ऐप्स खोल देते हैं, तो वह ‘हंग’ हो जाता है। इंसान का दिमाग भी ठीक वैसे ही काम करता है। मनोवैज्ञानिक इसे “Window of Tolerance” (सहनशीलता की खिड़की) के संदर्भ में समझाते हैं। जब तनाव और सूचनाओं का बोझ हमारी मानसिक क्षमता से बाहर निकल जाता है, तो हमारा नर्वस सिस्टम ‘क्रैश’ होने से बचने के लिए खुद को फ्रीज कर लेता है।www.who.int

Functional freeze न्यूरोलॉजिकल प्रभाव (Neurological Impact)

​लगातार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से हमारे दिमाग के Prefrontal Cortex (जो निर्णय लेने का काम करता है) पर भारी दबाव पड़ता है। वहीं, Amygdala (डर का केंद्र) सक्रिय रहता है। इसका परिणाम यह होता है कि:

  • निर्णय लेने में कठिनाई: छोटी-छोटी चीजों (जैसे आज क्या पहनें या क्या खाएं) में भी भारी उलझन महसूस होना।
  • इमोशनल नंबनेस (Emotional Numbness): अच्छी या बुरी खबरों पर कोई खास प्रतिक्रिया न होना। आप बस पत्थर की तरह महसूस करने लगते हैं।
  • याददाश्त में कमी: आप चीजें भूलने लगते हैं क्योंकि दिमाग नई जानकारी को स्टोर करने के बजाय सिर्फ ‘सर्वाइव’ करने की कोशिश कर रहा है।

सोशल मीडिया का ‘डार्क साइड’: परफेक्शन का दबाव

​अखबार के लेख में “परफेक्ट दिखने के प्रेशर” का जिक्र है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर दूसरों की ‘फिल्टर्ड’ लाइफ देखते-देखते हमारे अवचेतन मन में यह बैठ जाता है कि हमारी असल जिंदगी पर्याप्त नहीं है। यह “Social Comparison” हमारे भीतर कोर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन के स्तर को बढ़ा देता है, जो फंक्शनल फ्रीज की स्थिति को और गंभीर बना देता है।

योग और नर्वस सिस्टम का संबंध

​योग सिर्फ कसरत नहीं है, यह ‘Somatic Healing’ (शारीरिक उपचार) है। जब हम योग करते हैं, तो हम अपनी मांसपेशियों में जमा तनाव को रिलीज करते हैं। विशेष रूप से ‘Child’s Pose’ (बालासन) या ‘Savasana’ (शवासन) जैसे आसन नर्वस सिस्टम को ‘Safe’ महसूस कराते हैं। इससे शरीर का ‘Parasympathetic Nervous System’ सक्रिय होता है, जो ‘Freeze’ मोड को तोड़कर हमें वापस सामान्य स्थिति में लाता है।

Functional freeze (फंक्शनल फ्रीज) : एक ‘अदृश्य’ मानसिक लड़ाई (In-Depth Analysis)

​अक्सर हम समझते हैं कि तनाव का मतलब है चिल्लाना, रोना या काम न कर पाना। लेकिन ‘फंक्शनल फ्रीज’ इससे बिल्कुल अलग है। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ आप बाहर से तो “सुपर-प्रोडक्टिव” दिखते हैं, लेकिन अंदर से आपका नर्वस सिस्टम ‘शटडाउन’ मोड में होता है।

1. Functional freeze यह ‘बर्नआउट’ से कैसे अलग है?

​बर्नआउट (Burnout) में व्यक्ति पूरी तरह थक कर काम करना बंद कर देता है। इसके विपरीत, फंक्शनल फ्रीज में व्यक्ति ‘ऑटो-पायलट’ पर चलता है। आप ईमेल का जवाब देंगे, मीटिंग्स अटेंड करेंगे और खाना भी बनाएंगे, लेकिन आपको इनमें से किसी भी काम में खुशी या जुड़ाव महसूस नहीं होगा। आपका दिमाग सूचनाओं के ओवरलोड से बचने के लिए अपनी भावनाओं को ‘फ्रीज’ (सुन्न) कर लेता है।

2. सोशल मीडिया और ‘डोपामाइन लूप’ का खतरा

​लेख में जिक्र किया गया है कि सोशल मीडिया दिमाग पर ओवरलोड बढ़ाता है। दरअसल, जब हम स्क्रॉल करते हैं, तो हमारा दिमाग लगातार नई जानकारी को प्रोसेस करता है।

  • नेगेटिविटी बायस: सोशल मीडिया पर अक्सर ‘बुरी खबरें’ (Doomscrolling) हमें डराती हैं।
  • तुलना का दबाव: दूसरों की ‘परफेक्ट लाइफ’ देखकर हमारे अंदर हीन भावना आती है। यह कॉम्बिनेशन हमारे Amygdala (दिमाग का वह हिस्सा जो डर को प्रोसेस करता है) को लगातार सक्रिय रखता है, जिससे नर्वस सिस्टम कभी ‘Relax’ मोड में नहीं आ पाता।

3. नर्वस सिस्टम और ‘Polyvagal Theory’

Functional freeze ​विज्ञान के नजरिए से देखें तो हमारा नर्वस सिस्टम दो तरह से काम करता है: Fight or Flight (लड़ना या भागना) और Rest and Digest (आराम करना)। फंक्शनल फ्रीज तब होता है जब शरीर न तो लड़ पाता है और न ही आराम कर पाता है। यह ‘Dorsal Vagal’ स्थिति है, जहाँ शरीर ऊर्जा बचाने के लिए खुद को इमोशनली फ्रीज कर लेता है।

4. योग और शरीर की सक्रियता क्यों जरूरी है?

​अखबार के लेख में योग को नर्वस सिस्टम के लिए बेहतर बताया गया है। इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि गहरी सांस लेने (Pranayama) और स्ट्रेचिंग से हमारी Vagus Nerve सक्रिय होती है। यह नस दिमाग को संकेत भेजती है कि “सब सुरक्षित है,” जिससे फ्रीज मोड धीरे-धीरे टूटने लगता है।

Functional freeze त्वरित उपाय: आज से ही क्या करें?

  • Digital Minimums: दिन में कम से कम 2 घंटे ‘No Phone’ जोन बनाएं।
  • Grounding Exercises: जब दिमाग ओवरलोड लगे, तो अपने आस-पास की 5 चीजें देखें, 4 चीजें छुएं और 3 आवाजें सुनें। यह आपको वर्तमान में वापस लाता है।
  • Micro-Breaks: काम के बीच में 5 मिनट के लिए अपनी आँखें बंद करें और गहरी सांस लें।

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